और इस तरह, एक गुलाम बच्चा, एक राजकुमार, एक गड़रिया, आखिरकार इतिहास का सबसे बड़ा नेता और व्यवस्थादाता बन गया। उसकी कहानी आज भी हर उस व्यक्ति को प्रेरणा देती है जो अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना चाहता है।

मूसा बड़ा होकर एक शक्तिशाली राजकुमार बना। वह मिस्र की सेना का सेनापति था, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि वह असल में इब्रानी है। एक दिन उसने देखा कि एक मिस्री सिपाही एक बूढ़े इब्रानी गुलाम को पीट रहा है। मूसा का खून खौल उठा। उसने उस सिपाही को मार डाला। जब इस बात की खबर फिरौन (अब रामसेस द्वितीय) तक पहुँची, तो उसने मूसा को मौत की सजा सुना दी। मूसा को रेगिस्तान भागना पड़ा।

मूसा ने आकाश की ओर हाथ बढ़ाया। परमेश्वर ने एक प्रचंड पुरवाई हवा भेजी। रात भर हवा चली, और समुद्र का पानी दो हिस्सों में बँट गया। बीच में सूखा रास्ता बन गया। इब्रानी लोग दौड़ते हुए उस पार चले गए। जैसे ही आखिरी व्यक्ति किनारे पर पहुँचा, मूसा ने फिर हाथ बढ़ाया—समुद्र की लहरें लौटीं और पूरी मिस्री सेना को अपने में समा लिया।

रामसेस ने अपने ही बेटे को खोया। रातों-रात उसने आदेश दिया: "जाओ! यहाँ से चले जाओ!"

फिरौन रामसेस ने मूसा को पहचाना और ताना मारा: "तू जो राजकुमार था, आज गड़रिया बनकर आया है? मैं तेरे किसी परमेश्वर को नहीं मानता।"